अमेरिकी जालसाजों ने इंदौर की कंपनी से उड़ाए 3.72 करोड़, रकम वापस आई कैसे?

सोचिए, अचानक आपकी कंपनी के खाते से करोड़ों रुपये गायब हो जाएं। दिल तो बैठ गया ना? अब इस कहानी में इंदौर की एक कंपनी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब अमेरिकी जालसाजों ने 3.72 करोड़ रुपये उड़ाए, लेकिन अंत में रकम वापस भी आई। कैसे? चलिए, इस रोचक साइबर फ्रॉड की पूरी कहानी आपको बताते हैं।

अमेरिकी जालसाजों ने इंदौर की कंपनी से कैसे उड़ाए थे 3.72 करोड़?

अमेरिका से संचालित एक समूह ने इंदौर की कंपनी के बैंक खाते को हैक कर बड़ा साइबर फ्रॉड किया। ये केस साइबर अपराध की दुनिया में नया अध्याय लिखने जैसा था क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन को हैंगल करना आसान नहीं होता।

कहां से शुरू हुई कहानी?

सब कुछ तब शुरू हुआ जब कंपनी के खातों में ऑनलाइन लॉगिन के जरिये अनधिकृत प्रवेश हुआ और 3.72 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। ये कोई मामूली रकम नहीं थी, इसलिए मामले ने तूल पकड़ा।

कैसे हुआ ये साइबर फ्रॉड?

  • फिशिंग अटैक: कंपनी के किसी कर्मचारी को धोखे में डालकर पासवर्ड और लॉगिन डिटेल्स चुराई गईं।
  • मैलवेयर: कंप्यूटर या मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल करके संवेदनशील जानकारी हासिल की गई।
  • सॉफ़्टवेयर की कमजोरियां: बैंकिंग एप या वेबसाइट की सुरक्षा में सेंध लगाकर पैसा ट्रांसफर किया गया।

इंदौर साइबर सेल ने कैसे पकड़ा अमेरिकी जालसाजों को?

यहां से कहानी में ट्विस्ट आता है। जब पैसे निकल गए, तो इंदौर की साइबर सेल ने कई तकनीकी हथियार अपनाकर जांच शुरू की।

तकनीकी जांच के मुख्य कदम

  1. स्ट्रांग डिजिटल फॉरेंसिक्स: ट्रांजैक्शन्स की ट्रेसिंग कर पैसा भेजने वाले अमेरिकी बैंक तक पहुंच।
  2. अंतरराष्ट्रीय कोऑपरेशन: यूएस बैंक के सहयोग से फ्रॉड के स्रोत को अनवेल किया गया।
  3. राउटर और आईपी लॉग का विश्लेषण: नेटवर्क ट्रैफिक की पढ़ाई करके संदिग्धों के लोकेशन की जानकारी।

रकम वापस आई कैसे?

वैसे तो साइबर फ्रॉड में रकम लौटवाना मुमकिन कम होता है, लेकिन इस केस में बड़ी कामयाबी मिली। ऐसे हुआ:

  • फास्ट एक्शन: साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई की, जिससे ट्रांजैक्शन पूरी तरह लाभ उठाने से पहले रोक पाया।
  • बैंक की सहभागिता: यूएस बैंक ने भी सक्रिय सहयोग दिया और रकम को फ्रीज कराने में मदद की।
  • कानूनी कार्रवाई: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वारंट और पूछताछ के बाद पैसा इंदौर पहुंचा।

इससे क्या सीख मिलती है?

आप भी कहीं ना कहीं इस तरह के फ्रॉड के शिकार हो सकते हैं। ध्यान रखिए:

  • अपने ऑनलाइन बैंकिंग पासवर्ड और डिटेल्स कभी भी अनजाने लोगों से साझा न करें।
  • फिशिंग मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • अपने कंप्यूटर और मोबाइल पर एंटी-वायरस और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर अपडेट रखें।
  • साइबर फ्रॉड की छोटी-छोटी हरकतों पर भी तुरंत अपनी बैंक अथॉरिटी को सूचित करें।

तो अब आप समझ गए कि “अमेरिकी जालसाजों ने इंदौर की कंपनी से उड़ाए थे 3.72 करोड़, लेकिन वापस आई रकम; कैसे?” का पूरा सच। साइबर दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा है।

क्या आपकी कंपनी को भी कभी इस तरह का खतरा महसूस हुआ है? क्या आपने कभी साइबर फ्रॉड का सामना किया है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं! साथ ही हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करें ताकि आप साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई जानकारियों से अपडेट रहें।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here