क्या आपने कभी सुना है कि साइबर ठगी के खेल में ‘खच्चर खाते’ रखने वालों को 15 फीसदी कमीशन मिलता है? हाँ, यह कोई कहानी नहीं बल्कि एक सच्चाई है जो बैंककर्मियों की मिलीभगत के साथ चल रही है। अगर आपको लगता है कि आपके बैंक खाते से सुरक्षित हैं, तो एक बार इस खबर को जरूर पढ़िए। समय के साथ साइबर अपराधी और भी चालाक होते जा रहे हैं, इसलिए जागरूक होना जरूरी है।
खच्चर खाते क्या होते हैं?
सबसे पहले समझते हैं कि “खच्चर खाते” की बात क्यों हो रही है। असल में, खच्चर खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं जिन्हें साइबर अपराधी अपनी ठगी के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह खाते आम तौर पर उन लोगों के नाम पर बनाए जाते हैं जो खुद इस काम में सहभागी होते हैं, आमतौर पर गरीब या नौकरी-व्यवसाय विहीन लोग।
खच्चर खाते रखने वालों की भूमिका
- ये लोग अपराधियों को अपने खाते का उपयोग करने की अनुमति देते हैं।
- इसके बदले में उन्हें 15 फीसदी तक कमीशन मिलता है।
- ज्यादातर मामले में ये लोग जागरूक नहीं होते कि उनका खाता गलत कामों में उपयोग हो रहा है।
कैसे बैंककर्मी भी फंसे इस जाल में?
यहाँ एक चौंकाने वाली बात यह है कि केवल खच्चर खाते वाले ही नहीं, बल्कि कुछ बैंककर्मी भी इस साइबर ठगी के खेल में हिस्सेदार पाए गए हैं। इनके मदद से ठग अपने आपराधिक काम को और भी आसानी से अंजाम देते हैं।
- बैंककर्मियों के जरिए खाते खोलने और ट्रांजेक्शन की जांच में गड़बड़ी।
- जानकारी लीक करना जिससे अपराधियों को फायदा होता है।
- अवैध तरीके से खाता डेटा का उपयोग।
साइबर ठगी का खेल कैसे चलता है?
अब सवाल ये उठता है कि ये साइबर ठगी का खेल आखिर कैसे चलता है? तो चलिए बताते हैं कुछ ठोस तरीकों के बारे में:
- फर्जी खाते बनाना: बैंक कर्मचारी और अपराधी मिलकर नए खाते खोलते हैं जिनका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जाता है।
- टेक्नीकी हथकंडे: हैकिंग, फिशिंग, और मालवेयर के माध्यम से खातों में घुसपैठ।
- नकली ट्रांजेक्शन्स: काटी गई राशि का कुछ हिस्सा खच्चर खाते वालों को कमीशन के तौर पर दिया जाता है।
- पैसे की धोखाधड़ी: ये अपराधी कई बार अकाउंट होल्डर के पैसे निकाल लेते हैं और खाते वालों को कमीशन देने में ही संतुष्ट रहते हैं।
घर बैठे सतर्क कैसे रहें?
अब सवाल ये है कि आप और हम अपनी सुरक्षा कैसे करें? कुछ आसान उपाय हैं जो आपको इस बीच सतर्क और सुरक्षित रख सकते हैं:
- अपने बैंक खाते की नियमित जांच करें।
- कभी भी अंजाने संदेश या कॉल पर बैंक डिटेल्स न दें।
- दो-चरणीय प्रमाणिकरण (2FA) का उपयोग करें।
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत बैंक को सूचित करें।
- अपने बैंक खाते के पासवर्ड और पिन किसी के साथ साझा न करें।
निष्कर्ष: जागरूकता ही बचाव है
खच्चर खाते वालों को 15 फीसदी कमीशन और बैंककर्मियों की मिलीभगत जैसी खबरें हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि हमारा पैसा कितना सुरक्षित है। हालांकि ये पूरी साइबर ठगी का एक हिस्सा है, लेकिन जागरूकता से हम खुद को बचा सकते हैं। अगर हम सतर्क रहेंगे, तो इस जाल में फंसने से बचा जा सकता है। क्या आपके आसपास किसी ने ऐसी ठगी का सामना किया है? आप क्या कदम उठाएंगे? नीचे कमेंट में जरूर साझा करें।
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