क्या आपने कभी सोचा है कि एक फ्रेंडली स्नातक, जो “London School of Economics” जैसे प्रेस्टिजियस संस्थान से पास आउट हो, कितना गहरा अपराध कर सकता है? हाल ही में दिल्ली में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां LSE से ग्रैजुएट एक शख्स समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो थाईलैंड से इंटरनेशनल साइबर एक्सटॉर्शन रैकेट चला रहे थे। अब सवाल उठता है – ये साइबर क्राइम रैकेट क्या था और ऐसी घटनाएं हमारे डिजिटल जीवन के लिए क्यों खतरा हैं?
दिल्ली में LSE ग्रैजुएट समेत 3 गिरफ्तार – मामला क्या है?
कुछ दिनों पहले दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी साइबर क्राइम साजिश को नाकाम किया, जिसमें तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से एक LSE का ग्रैजुएट था। ये लोग थाईलैंड से चल रहे थे और दुनिया भर में साइबर एक्सटॉर्शन यानी इंटरनेट पर जबरन पैसे वसूलने के काम में लगे थे।
साइबर एक्सटॉर्शन क्या होती है? सरल शब्दों में, ये एक अवैध प्रैक्टिस है जिसमें अपराधी इंटरनेट के जरिये किसी व्यक्ति या संगठन को धमका कर या उनकी जानकारियों को leverage बनाकर पैसे या अन्य फायदे लेते हैं।
थाईलैंड से चलता था इंटरनेशनल साइबर एक्सटॉर्शन रैकेट
अब आप सोच रहे होंगे कि ये रैकेट थाईलैंड से कैसे चल रहा था? इंटरनेट की बदौलत देश-प्रदेश की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। ये गिरोह बायोमेट्रिक डेटा चुराने, फर्जी दस्तावेज बनाकर ब्लैकमेल करने और बड़ी रकम वसूलने का काम करता था।
कैसे काम करता था ये गिरोह?
- तीन आरोपियों के पास आधुनिक साइबर उपकरण और तकनीक थी।
- वे थाईलैंड में बैठकर ग्लोबल टारगेट्स को निशाना बनाते।
- फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोगों को डराते-धमकाते और पर्सनल या कॉन्फिडेंशियल डाटा से ब्लैकमेल करते।
- पैसे डिजिटल मोड में वसूलते, जिससे ट्रैक करना मुश्किल होता।
क्या हम सुरक्षित हैं साइबर धमकियों से?
इन घटनाओं को देखकर हमें ये समझना होगा कि डिजिटल प्लेटफार्म पर हमारी सुरक्षा कितनी जरूरी है। साइबर एक्सटॉर्शन जैसी घटनाएं सिर्फ बड़े लोगों का मुद्दा नहीं है, ये हर इंटरनेट यूजर के लिए खतरा हैं।
तो क्या करें?
- अपनी पर्सनल जानकारी हमेशा सुरक्षित रखें।
- अंजान कॉल, मैसेज या ईमेल पर भरोसा न करें।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अपनाएं।
- अगर आपको कोई साइबर धमकी मिले, तो तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।
क्या इस गिरफ्तारी से बड़ा संदेश मिलता है?
बिल्कुल! ये गिरफ्तारी बताती है कि हमारी पुलिस साइबर क्राइम के खिलाफ कितनी सजग है। चाहे अपराधी विदेश में बैठा हो या हमारे ही बीच, कानून उसे नहीं बख्शेगा। साथ ही हमें भी अपनी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
तो दोस्तों, इस खबर से क्या सीख मिली आपको? क्या आपको लगता है कि डिजिटल दुनिया में हम पूरी तरह से सुरक्षित हैं? नीचे कमेंट्स में अपनी राय जरूर दें। साथ ही इस तरह के ताजा अपडेट्स के लिए हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करना न भूलें!

