क्या आप सोच सकते हैं कि आपकी बेटी की गिरफ्तारी का भय और एआई से निकली उसकी रोने की आवाज़ आपको कैसे डराने के लिए इस्तेमाल हो सकती है? सुनने में लगता है फिल्मी कहानी, पर यह बिहार में हकीकत बन चुकी है। साइबर ठगों ने पुलिसवाले का रुप धारण कर, उसके परिवार को निशाना बनाया और तकनीक का ऐसा खेल खेला कि आम इंसान दंग रह जाए। 2023 में लगातार बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की ऐसी घटना हमारे लिए चेतावनी की घंटी है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं इस साइबर ठगी की कहानी और साथ ही सीखते हैं कैसे आप खुद को और अपने परिवार को ऐसे ऑनलाइन खतरों से बचा सकते हैं।
बेटी की गिरफ्तारी का भय: साइबर ठगों का नया हथकंडा
जब आपके सामने कोई पुलिसवाला आकर कोर्ट की कार्रवाई की बात करे, तो स्वाभाविक है कि डर जाएं। खासकर जब बात आपकी बेटी की गिरफ्तारी तक आ जाए। साइबर ठग इस डर का भरपूर फायदा उठाते हैं। बिहार के पटना में एक इंसान को इस तरह से फंसाया गया कि उसे लगा जैसे उनकी बेटी सच में गिरफ्तारी के कगार पर है।
इसी दौरान, उसने एआई की मदद से बेटी की मानवीय आवाज़ निकालकर उसमें रोने का डरावना भाव भी जोड़ दिया। सोचिए, जब आपको अपनी बेटी की आवाज़ सुनाई दे जो आपसे दया मांग रही हो, तो डरना लाज़मी है। यह तकनीक ठगों के लिए एक नया हथियार बन गई है।
एआई से सुनवाई रोने की आवाज: तकनीक का साइबर ठगी में इस्तेमाल
एआई वॉइस क्लोनिंग क्या है?
एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक में किसी व्यक्ति की आवाज़ को रिकॉर्ड करके उसे कंप्यूटर में प्रोसेस किया जाता है, ताकि वही आवाज़ भविष्य में भी नकल की जा सके। यहाँ ठगों ने इसका इस्तेमाल कर पीड़ित की बेटी की आवाज़ को नकली रूप में बनाया।
कैसे चलते हैं ऐसे ठगी के जाल?
- पहला कदम: सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से परिवार की जानकारी जुटाना।
- दूसरा कदम: फोन या मैसेज के जरिए पुलिसकर्मी होने का नाटक कर डराना।
- तीसरा कदम: एआई से बनाई गई आवाज़ के जरिए खुद को और विश्वसनीय दिखाना।
- अंतिम कदम: आर्थिक लेनदेन या संवेदनशील जानकारी निकालना।
बिहार में पुलिसवाला बन साइबर ठगी: क्या करें?
ऐसे मामलों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि पुलिस कभी भी फोन पर गिरफ्तारी के लिए धमकी नहीं देती? तो अगर आपको भी कोई ऐसा कॉल आए, तो तुरंत तार्किक सोच से काम लें।
सावधानी के कुछ आसान तरीके
- फोन कॉल या मैसेज की असलियत जांचें।
- ऑनलाइन जानकारियों को साझा करने से बचें।
- पुलिस स्टेशन या संबंधित कार्यालय से सीधे संपर्क करें।
- शक हो तो परिवार या दोस्तों से सलाह लें।
- किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले पुष्टि जरूर करें।
साइबर सुरक्षा: हम सबकी जिम्मेदारी
जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराध भी नए-नए रूप ले रहा है। ऐसे में केवल पुलिस या सरकार पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। व्यक्ति स्तर पर हमें भी सतर्कता अपनानी होगी।
अपने मोबाइल और कंप्यूटर की सिक्योरिटी बढ़ाएं। सोशल मीडिया पर अपने परिवार की निजी जानकारी सीमित करें। ऐसी खबरों को पढ़कर, जागरूक हो जाएं और दूसरों को भी जागरूक करें।
निष्कर्ष
बेटी की गिरफ्तारी का भय और एआई से निकली रोने की आवाज़ जैसी घटनाएं हमें दिखाती हैं कि साइबर ठगी अब कितनी उन्नत हो चुकी है। यह दौर सावधानी और जागरूकता का है। क्या आप तैयार हैं ऐसी ठगी से लड़ने के लिए? अपने अनुभव या सुझाव नीचे कमेंट में साझा करें।
और हां, अगर आप साइबर सुरक्षा और उससे जुड़ी खबरों के अपडेट चाहते हैं, तो हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करना न भूलें।

