ठग इतने एक्सपर्ट कि सुप्रीम कोर्ट वकील भी फंसी, 9 दिन डिजिटल अरेस्ट में

क्या आपने कभी सोचा है कि इतने माहिर ठग हो सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील तक उनके जाल में फँस जाएं? जी हाँ, ये सच है! हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक सुप्रीम कोर्ट की वकील को 9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उनसे सवा 3 करोड़ रुपए ठगे गए। इस घटना ने सबको चौंका दिया और कई सवाल खड़े कर दिए कि आखिर कैसे कोई इतना चालाक हो सकता है?

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और इस केस में इसे कैसे लागू किया गया?

डिजिटल अरेस्ट का मतलब होता है किसी की डिजिटल गतिविधि पर नियंत्रण रखना, जैसे कि मोबाइल, इंटरनेट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना। इसमें उनके अकाउंट्स को साइबर माध्यम से ब्लॉक किया जा सकता है। लेकिन आपकी सोच ये मत करें कि ये केस कोई आम मामला था। जब सुप्रीम कोर्ट की वकील भी इसका शिकार हो जाएं, तो मामला गंभीर होने के साथ-साथ बेहद चौंकाने वाला भी है।

क्या हुआ इस केस में?

  • सुप्रीम कोर्ट की महिला वकील को डिजिटल अरेस्ट में रखा गया करीब 9 दिन तक।
  • ठगों ने कुल 3.25 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया।
  • उन्होंने इस पूरे खेल में इतना माहिर तरीका अपनाया कि वकील भी इसका शिकार हो गईं।
  • यह मामला न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी वकील के लिए एक बड़ी चुनौती था।

ठग इतने एक्सपर्ट कैसे बन गए?

सोचिए, ठगी करने वाले इतने माहिर कि वे सुप्रीम कोर्ट की वकील को भी चकमा दे दें। इसका मतलब ये हुआ कि उनकी चोरी और ठगी की टेक्नोलॉजी तथा योजनाएं काफी उन्नत हैं। डिजिटल युग में ऐसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि साइबर क्राइम की दुनिया में पकड़ना मुश्किल होता है।

ठगों के एक्सपर्ट तरीकों में ये शामिल हैं:

  • फिशिंग स्कैम्स: नकली वेबसाइट और ईमेल से जानकारी चुराना।
  • फेक कॉल्स और मैसेजेज: बैंक, सरकारी या वकील जैसी प्रतिष्ठित जगहों से कॉल जैसा दिखाकर झांसे में लेना।
  • डिजिटल ट्रैप: मोबाइल ऐप या इंटरनेट पर spyware और malware का इस्तेमाल।
  • सोशल इंजीनियरिंग: किसी की विश्वसनीयता का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करना।

ऐसे कैसे बचें ठगों से?

अब सवाल ये है कि अगर सुप्रीम कोर्ट की वकील भी ठगों के जाल में फंस सकती हैं, तो हम आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे? डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि थोड़ी सी सावधानी से आप इन्हें चकमा दे सकते हैं।

  • संदिग्ध लिंक और ईमेल से बचें: बिना जांच पड़े कोई भी लिंक या अनजान ईमेल खोलने से बचें।
  • दो-चरणीय प्रमाणीकरण अपनाएं: आपके डिजिटल अकाउंट्स को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
  • पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करें: मजबूत और यूनिक पासवर्ड बनाएं और उन्हें मैनेज करें।
  • किसी भी वित्तीय लेनदेन में सावधानी: किसी भी प्रकार की बड़ी राशि के लेनदेन से पहले पुष्टि जरूर करें।
  • डिजिटल डिवाइस और एप्स की सुरक्षा: भरोसेमंद एंटीवायरस और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अवश्य करें।

निष्कर्ष: तकनीक के दौर में जागरूकता ही सुरक्षा है

ठग इतने एक्सपर्ट कि सुप्रीम कोर्ट की वकील भी झांसे में आ गईं, ये कहानी हमें एक बड़ा सबक देती है। चाहे आप कितना भी अनुभवी क्यों न हों, तकनीकी क्राइम आज हर किसी के लिए खतरा है। इसलिए सुरक्षा के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है। क्या आपने कभी ऐसी कोई डिजिटल ठगी का सामना किया है? या इस खबर को पढ़कर आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट में अपने विचार जरूर साझा करें!

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