बीकानेर। साइबर अपराधी अब ठगी की रकम को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। बीकानेर साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने साइबर ठगी से हासिल धन को गोल्ड लोन खातों के माध्यम से वैध बैंकिंग लेनदेन में बदलने का तरीका विकसित कर लिया था। पुलिस ने इस मामले में बज्जू क्षेत्र के मिठड़िया गांव निवासी 35 वर्षीय सुनील ज्याणी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से एक स्विफ्ट कार और तीन महंगे मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह सबसे पहले अपने परिचितों या अन्य लोगों के नाम पर गोल्ड लोन प्राप्त करता था। सोना गिरवी रखकर लिए गए इस लोन की राशि संबंधित बैंक खातों में पहुंचती थी। इसके बाद देशभर में सक्रिय साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर ठगी करते थे और ठगी से प्राप्त रकम सीधे बैंक खातों में रखने के बजाय गोल्ड लोन खातों में जमा करवा देते थे।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गोल्ड लोन खाते में जमा की गई राशि से लोन का भुगतान कर दिया जाता था। लोन बंद होने के बाद गिरवी रखा सोना वापस ले लिया जाता या उसी सोने के आधार पर दोबारा नया लोन हासिल कर लिया जाता था। इस प्रक्रिया के जरिए साइबर ठगी का पैसा वैध वित्तीय लेनदेन जैसा दिखाई देने लगता था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने करीब 56 ग्राम सोना गिरवी रखकर कई बार गोल्ड लोन लिया। इन खातों में साइबर अपराध से जुड़ी लगभग 25 लाख रुपये की राशि जमा करवाई गई, जिसे बाद में बैंक खातों के जरिए निकाल लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बदले आरोपी और उसके सहयोगियों को कमीशन भी मिलता था।एसपी ने बताया कि सामान्य बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन मिलने पर उन्हें फ्रीज या लियन किया जा सकता है, लेकिन गोल्ड लोन कंपनियों के कुछ ट्रेडिंग आधारित खातों में ऐसी कार्रवाई तत्काल संभव नहीं होती। इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर आरोपी साइबर ठगी की रकम को सिस्टम से बचाने में सफल हो रहे थे।पुलिस का दावा है कि यह देश में सामने आया अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें साइबर ठगी की रकम को गोल्ड लोन खातों के माध्यम से वैध बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। मामले में अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश जारी है।

राजस्थान के बीकानेर में साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह साइबर अपराध से प्राप्त रकम को गोल्ड लोन खातों के माध्यम से वैध बैंकिंग लेनदेन का रूप देने का प्रयास कर रहा था। मामले में बज्जू क्षेत्र के मिठड़िया गांव निवासी 35 वर्षीय सुनील ज्याणी को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से एक स्विफ्ट कार और तीन महंगे मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
गोल्ड लोन खातों का ऐसे किया जाता था इस्तेमाल
जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने बताया कि जांच में सामने आया कि गिरोह सबसे पहले परिचितों या अन्य लोगों के नाम पर सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेता था। लोन की राशि संबंधित बैंक खातों में जमा होती थी। इसके बाद देशभर में सक्रिय साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते और ठगी से मिली रकम सीधे सामान्य खातों में भेजने के बजाय इन गोल्ड लोन खातों में जमा कराते थे।
लोन चुकाकर वापस ले लेते थे सोना
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से जमा की गई राशि से गोल्ड लोन का भुगतान कर दिया जाता था। लोन बंद होने के बाद गिरवी रखा सोना वापस ले लिया जाता या उसी सोने के आधार पर दोबारा नया लोन ले लिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया से ठगी की रकम सामान्य बैंकिंग लेनदेन जैसी दिखाई देने लगती थी। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने करीब 56 ग्राम सोना गिरवी रखकर कई बार गोल्ड लोन लिया। इन खातों में साइबर अपराध से जुड़ी लगभग 25 लाख रुपये की राशि जमा हुई, जिसे बाद में बैंक खातों के जरिए निकाला गया। इसके बदले आरोपी और उसके सहयोगियों को कमीशन भी मिलता था।
तकनीकी खामी का उठाया फायदा
एसपी ने बताया कि सामान्य बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन मिलने पर उन्हें फ्रीज या लियन किया जा सकता है, लेकिन गोल्ड लोन कंपनियों के कुछ विशेष खातों में तत्काल ऐसी कार्रवाई संभव नहीं होती। गिरोह इसी तकनीकी व्यवस्था का फायदा उठाकर साइबर ठगी की रकम को जांच एजेंसियों की निगरानी से बचाने की कोशिश करता था।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस का कहना है कि यह अपनी तरह का एक अनोखा मामला है, जिसमें कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को गोल्ड लोन खातों के जरिए वैध दिखाने की सुनियोजित प्रक्रिया सामने आई है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और सहयोगियों की तलाश कर रही है। मामले की जांच जारी है।

