विदेशी कॉल को लोकल बनाकर करोड़ों का चूना, नोएडा में अवैध एक्सचेंज पकड़ा

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी कॉल कहां जाती है और क्या उसमें छेड़छाड़ हो रही है? हाल ही में नोएडा से एक ऐसी खबर आई है जिसने सभी को चौंका दिया। विदेशी कॉल को लोकल कॉल बनाकर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाला एक अवैध टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा गया है। चलिए इस कहानी के पीछे छुपे जाल को विस्तार से समझते हैं।

विदेशी कॉल को लोकल कॉल कैसे बनाया जाता था?

अवैध टेलीफोन एक्सचेंज में यह चालाकी इस्तेमाल की जाती थी कि विदेशी कॉल को सीधे ज्यादा महंगी कॉल की बजाय लोकल कॉल के रूप में प्रोसेस किया जाता था। आपको लगता होगा कि ये कैसे संभव है? यह सब किया जाता था खास हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की मदद से, जो कॉल को छुपाकर स्थानीय नेटवर्क का रूप दे देता था।

टेक्निकल तरीका:

  • सिग्नलिंग फेकिंग: कॉल के सिग्नल को मॉडिफाई करके यह दिखाया जाता था कि कॉल लोकल नेटवर्क पर हो रही है।
  • फर्जी एक्सचेंज सेटअप: असली टेलीफोन नेटवर्क के बीच एक छुपा हुआ एक्सचेंज जो बिना अनुमति काम करता था।
  • डेटा ट्रैफिक का रीडायरेक्शन: कॉल की ट्रैफिक को विदेश से सीधे लोकल नेटवर्क की तरफ मोड़ा जाता था जिससे लागत कम दिखे।

सरकार को कितना नुकसान हुआ?

सरकार सॉवरेन इंटरेस्ट के तहत हर कॉल पर शुल्क लगाती है, खासकर जब वो विदेशी कॉल हो। इस धोखाधड़ी के चलते, हजारों कॉल की असली पहचान छुपाकर लोकल कॉल का रूप दिया गया। अनुमानित नुकसान करोड़ों रुपये का है।

नुकसान के पहलू:

  1. टैक्स चोरी जो सीधे सरकारी खजाने को प्रभावित करती है।
  2. सुरक्षा खतरे क्योंकि अवैध एक्सचेंज का उपयोग आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है।
  3. वैध कम्युनिकेशन नेटवर्क में गड़बड़ी और विश्वास का नुकसान।

नोएडा पुलिस और ATS ने कैसे किया पर्दाफाश?

नोएडा ATS (Anti Terrorism Squad) और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने इस अवैध गतिविधि पर रोक लगाई। एक गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने जब जांच शुरू की तो असली खेल सामने आया। वे लगातार निगरानी में रहे और अंततः नोएडा के एक इलाक़े में इस अवैध टेलीफोन एक्सचेंज को बंद कर दिया।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

  • मौके से कई कॉलिंग उपकरण और जालसाजी में इस्तेमाल कंप्यूटर मिले।
  • कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
  • मामला सरकारी सुरक्षा एजेंसियों को भी सौंपा गया।

क्या ये केवल एक isolated case है?

दुर्भाग्यवश, नहीं। देश में अलग-अलग जगहों पर ऐसी अवैध गतिविधियां होती रहती हैं। कॉलिंग नेटवर्क में छेड़छाड़ करके मुनाफा कमाने वाले गिरोह हर समय नए तरीके खोज रहे हैं। इसलिए सरकार लगातार निगरानी बढ़ा रही है।

हम आम नागरिक इस समस्या से कैसे जुड़ते हैं?

हम में से ज्यादातर लोगों को कॉलिंग तकनीक के ये पेचिदगियां समझ नहीं आतीं, लेकिन इसका असर हम सब पर पड़ता है। जब सरकार के राजस्व में छेड़छाड़ होती है, तो इसका प्रभाव सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सेवाओं पर भी पड़ता है, जिनका वित्तीय हिस्सा टैक्स से आता है।

इसलिए जरूरी है कि हम अपने आसपास ऐसी संदिग्ध कॉलिंग नेटवर्क की शिकायत करें और जागरूक रहें।

निष्कर्ष: चेतन रहें, सुरक्षित रहें

विदेशी कॉल को लोकल बना सरकार को लगा रहे थे करोड़ों का चूना, ये मामला हमें बताता है कि हमें तकनीक के साथ सतर्क रहना कितना जरूरी है। सरकार की मुस्तैदी और हमारी जागरूकता ही ऐसी काले धंधों को खत्म कर सकती है।

आपका क्या विचार है? क्या आपने कभी ऐसी ठगी या संदिग्ध कॉल का सामना किया है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें, और अगर आप और अपडेट चाहते हैं तो हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करें।

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