क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी डिजिटल जानकारी का गलत इस्तेमाल होकर आपकी सारी बचत छिन सकती है? गाजियाबाद में एक बुजुर्ग दंपति के साथ हुआ मामला इस डर को और भी समझने लायक बना देता है। अप्रैल 2024 में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना में बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखा देकर पौने तीन करोड़ रुपये लूट लिए गए। तो आखिर कैसे हुआ यह डिजिटल अरेस्ट और इससे बचाव के उपाय क्या हैं? आइये विस्तार से जानते हैं।
गाजियाबाद में बुजुर्ग दंपति की डिजिटल अरेस्ट की पूरी कहानी
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब इन बुजुर्ग दंपति को फोन पर सरकारी अधिकारी बनने का नाटक करके संपर्क किया गया। उन्हें बताया गया कि उनकी डिजिटल पहचान से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है और तुरंत कार्रवाई करनी जरूरी है। डर और असमंजस में वे गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस वाले जैसे दिखने वाले लोगों से मिलते रहे। लेकिन असलियत कुछ और थी।
डिजिटल अरेस्ट की आड़ में इन अपराधियों ने बुजुर्गों को विश्वास में लेकर उनके बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, और अन्य संपत्तियों की जानकारी लेकर लगातार बड़े- बड़े पैसे उड़ाए। कुल मिलाकर लगभग 2.75 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम चोरी की गई।
डिजिटल अरेस्ट का मतलब और कैसे होता है धोखा?
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट का मतलब ऐसा झांसा देना कि आपकी डिजिटल गतिविधियाँ या पहचान पर कोई कानूनी कार्रवाई हो रही है जिससे डर कर आप अपनी सारी सुरक्षा खोल देते हैं। कुछ लोग इसे साइबर जालसाजी का एक रूप भी कह सकते हैं।
कैसे धोखा देते हैं अपराधी?
- फर्जी कॉल और मैसेज: वे सरकारी अधिकारियों या पुलिस का झांसा देकर कॉल करते हैं।
- डिजिटल पहचान की बात: आपकी आधार, पैन, बैंक विवरण आदि लॉक होने की धमकी देते हैं।
- फुट-फ़ुटा दबाव: डराते हैं कि अगर आप तुरंत मदद नहीं करेंगे तो गिरफ्तारी होगी।
- विश्वास में लेना: फर्जी ऐप्स या वेबसाइट से आपकी जानकारी निकाल लेते हैं।
- पीछे से लूट: फिर आपकी संपत्ति या खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
बुजुर्गों को कैसे करें डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव?
यह घटना सिर्फ गाजियाबाद की ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बढ़ रहे साइबर अपराध की आगाह करने वाली मिसाल है। इस तरह के मामलों से खुद को और अपने बुजुर्गों को बचाने के कुछ जरूरी सुझाव:
- कभी भी अनजान नंबर से कॉल आने पर अपनी जानकारी साझा न करें।
- सरकारी एजेंसियाँ कभी भी फोन पर बैंक या पैन जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगतीं।
- ऐसे कॉल या मैसेज आने पर अपने परिवार या नजदीकी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करें।
- अपने डिजिटल अकाउंट्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) जरूर चालू करें।
- शिकायत दर्ज करवाने और जानकारी प्राप्त करने के लिए साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग करें।
क्या करे अगर आप भी ऐसे धोखे का शिकार हुए हैं?
यदि आप या आपके परिवार के किसी सदस्य पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखा हुआ है, तो तुरंत कदम उठाएं:
- सबूत संजोएं – कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, ट्रांजेक्शन जानकारी आदि।
- फौरन साइबर क्राइम रिपोर्ट दर्ज कराएं।
- अपने बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से संपर्क करें और खाते को सुरक्षित करें।
- अपने पासवर्ड तुरंत बदलें और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाएं।
- किसी भरोसेमंद प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ की मदद लें।
निष्कर्ष: सतर्क रहें और डिजिटल सुरक्षा को अपनाएं
गाजियाबाद में बुजुर्ग दंपति के साथ हुई यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी बरतना आपके लिए कितना जरूरी है। कोई भी कॉल, मैसेज या ईमेल जो अनजाना लगे, उसे तुरंत नजरअंदाज न करें। हमेशा अपने निजी और वित्तीय डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
तो, आप क्या सोचते हैं? क्या आपके पास भी कोई डिजिटल धोखाधड़ी का अनुभव है? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें और हमारे साथ जुड़ें ताजतरंग अपडेट्स के लिए।

