कोविड काल में घाटा हुआ तो स्कूल संचालक ने साइबर ठगी शुरू की

कोविड काल के दौरान कई व्यवसायों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग इतने दबाव में आकर गलत रास्ता भी अपना लेते हैं? ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक स्कूल संचालक ने अपने घाटे की भरपाई के लिए साइबर ठगी को चुना। यह घटना हम पर एक जरूरी सवाल छोड़ जाती है कि आर्थिक तंगी में नैतिकता कितनी मजबूत रह पाती है?

कोविड काल में घाटा हुआ और शुरू हुई साइबर ठगी

कोविड-19 के दौरान स्कूल बंद होने और आर्थिक गतिविधियाँ धीमी पड़ जाने से बहुत से स्कूल संचालकों को भारी नुकसान हुआ। मध्य प्रदेश या राजस्थान के एक स्कूल संचालक ने भी इसी दबाव को सहन नहीं कर पाया और उन्होंने ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगना शुरू कर दिया।

स्कूल संचालक की चालाकी

सरकार की मदद न मिलने और घाटे के बोझ तले दबे संचालक ने निवेश के बहाने से लोगों को फंसाया। वह अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए भरोसा जता कर निवेश के लालच में लोगों को झांसा देता था। फिर पैसे लेकर गायब हो जाता था।

कैसे पकड़ा गया?

  • पुलिस को कई शिकायतें मिलीं, जिसमें लोग कह रहे थे कि उन्हें नकली निवेश स्कीम में फंसाया गया।
  • डीटेल जांच में पता चला कि यह वही स्कूल संचालक था जो कोविड के समय कारोबार में घाटे के बाद ठगी करता था।
  • आखिरकार राजस्थान से गिरफ्तार कर दिल्ली पुलिस ने इस केस को सॉल्व किया।

साइबर ठगी से बचाव के उपाय

अब सवाल आता है कि आप ऐसी धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं? आइए कुछ टिप्स देखें:

  • स्रोत पर भरोसा करें: केवल मान्य और विश्वसनीय संस्थाओं में ही निवेश करें।
  • ऑनलाइन पेमेंट की सुरक्षा: हमेशा सिक्योर पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • खुलासा पूछें: जिनसे निवेश कर रहे हैं, उनके बारे में पूरा बैकग्राउंड चेक करें।
  • संदेह हो तो जांच करें: कोई भी ऑफर बहुत ज्यादा फायदा दिखाए तो उसे सावधानी से देखें और जरूरत हो तो एक्सपर्ट से सलाह लें।

क्या कोविड काल ने लोगों को साइबर अपराध की ओर धकेला?

कोविड काल ने हम सभी की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा डिजिटल बना दिया। ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन क्लासेस, और वर्क फ्रॉम होम ने लोगों को इंटरनेट पर निर्भर बना दिया। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों में भी इजाफा हुआ।

ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता दें और खुद को अपडेट रखें। गलत समय में गलत फैसले अक्सर जिंदगी को मुश्किल बना देते हैं।

निष्कर्ष: साइबर ठगी से सीख लें और सतर्क रहें

कोविड काल में घाटा हुआ तो स्कूल संचालक के साइबर ठगी की कहानी हमें इस बारे में सोचने पर मजबूर करती है कि आर्थिक संकट में भी नैतिकता और जिम्मेदारी बनाये रखना कितना जरूरी है। साथ ही यह भी समझना चाहिए कि सतर्कता से हम खुद को और अपने परिवार को साइबर ठगी से बचा सकते हैं।

तो आप क्या सोचते हैं? क्या आर्थिक दबाव में ऐसे कृत्य जायज ठहराए जा सकते हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगा हो तो हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब करना न भूलें ताकि आपको ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रहे।

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